हर साल रोशनी का पर्व दीवाली (Diwali 2025) अपने साथ धुआं, शोर और जहरीली हवा भी छोड़ जाता है। इसी बीच, कुछ सालों से बाजार में एक नया नाम खूब सुर्खियों में है – ग्रीन पटाखे (Green Crackers)। सुनने में ये पर्यावरण के रक्षक लगते हैं, लेकिन क्या ये सच में हवा को साफ रखते हैं या फिर सिर्फ नाम के ‘ग्रीन’ हैं ?
अगर आप भी इस दिवाली यह जानना चाहते हैं कि ये पटाखे सच में प्रदूषण घटाते हैं या सिर्फ दिखावा हैं, और ये पारंपरिक पटाखों से कैसे अलग हैं (Green Crackers vs Regular Crackers), तो आगे पढ़िए-
क्या हैं ग्रीन पटाखे.
ग्रीन पटाखे ऐसे ईको-फ्रेंडली पटाखे हैं जिन्हें सीएसआईआर–नीरी (CSIR–NEERI) यानी नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ने विकसित किया है। इनका डिजाइन इस तरह से किया गया है कि ये पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम धुआं और प्रदूषण फैलाते हैं।
इनमें कम कच्चा माल, छोटा शेल आकार और राख रहित पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही, इनमें ऐसे तत्व मिलाए जाते हैं जो धूल को दबाते हैं और सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड व पार्टिकुलेट मैटर जैसे हानिकारक गैसों के उत्सर्जन को घटाते हैं।
आम पटाखों और ग्रीन पटाखों में फर्क.
सामान्य पटाखों में सीसा, बेरियम और एल्युमिनियम जैसी भारी धातुएं होती हैं, जो जलने पर वायु और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरनाक होती हैं।
वहीं, ग्रीन पटाखों में जियोलाइट और आयरन ऑक्साइड जैसे पदार्थ शामिल होते हैं, जो रासायनिक मिश्रण को नियंत्रित कर प्रदूषण को कम करते हैं। इसलिए ये सामान्य पटाखों की तुलना में लगभग 30% कम प्रदूषण फैलाते हैं और अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं।