मुंगेली – मोदी सरकार द्वारा मनरेगा की मूल आत्मा को खत्म करने के विरोध में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर पुरे प्रदेश में विरोध प्रर्दशन किया जा रहा है। जिसको लेकर 10 जनवरी को मुंगेली जिले के लिए पत्रकार वार्ता प्रभारी बनाये गये अरूण वोरा ने पत्रकारों से रूबरू होकर जानकारी दी । इस दौरान उन्होने कहा कि मनरेगा की मूल आत्मा खत्म करने के विरोध में कांग्रेस द्वारा विभिन्न कार्यक्रमो के माध्यम से विरोध दर्ज कराया जायेगा ।
इसी कडी में पुराना बस स्टैण्ड में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष घनश्याम वर्मा एवं कार्यक्रम प्रभारी डॉ. प्रेमचंद जायसी के नेतृत्व में 1 दिन का उपवास रखकर विरोध प्रर्दशन किया गया । इस दौरान जिलाध्यक्ष ने कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को ही खत्म करके श्रमिकों से काम का अधिकार छीना है मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। 100 दिन से 125 दिन की मजदूरी वाली बात सिर्फ एक चालाकी है, वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 70 प्रतिशत गांव में भाजपा की सरकार आने के बाद से अघोषित तौर पर काम नहीं दिया जा रहा है। पिछले 11 सालों में मोदी सरकार बनने के बाद मनरेगा में काम देने का राष्ट्रीय औसत मात्र 38 दिनों का है। मतलब 11 सालो में मोदी सरकार किसी भी साल 100 दिन काम नहीं दे पाई। मनरेगा काम करने का सही अधिकार था, उसे अब एक एडमिनिस्ट्रेटिव मदद में बदला जा रहा है, जो पूरी तरह से केंद्र की मर्जी पर निर्भर है। मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है।
डॉ. प्रेमचंद जायसी ने कहा कि मनरेगा के तहत, सरकारी ऑर्डर से कभी काम नहीं रोका गया। नया सिस्टम हर साल तय टाइम के लिए जबरदस्ती रोजगार बंद करने की इजाजत देता है, जिससे राज्य यह तय कर सकता है कि गरीब कब कमा सकते हैं और कब उन्हें भूखा रहना होगा। एक बार फंड खत्म हो जाने पर, या फसल के मौसम में, मज़दूरों को महीनों तक रोज़गार से दूर रखा जा सकता है।संजीत बनर्जी ने कहा कि मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फ्रेमवर्क ने इसे एक कंडीशनल, केंद्र द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्कीम में बदल दिया है।




