रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में चुनाव संपन्न हुए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है और परिषदों का गठन भी हो चुका है, लेकिन एल्डरमैनों की नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई है। इस कारण एल्डरमैन बनने की उम्मीद लगाए बैठे भाजपा कार्यकर्ताओं को फिलहाल केवल आश्वासन ही मिल रहा है। सभी की निगाहें अब राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हुई हैं।
राज्य शासन आमतौर पर कैबिनेट के निर्णय के बाद नगरीय प्रशासन विभाग के माध्यम से एल्डरमैनों की नियुक्ति से संबंधित आदेश जारी करता है। चूंकि, यह नियुक्ति अक्सर राजनीतिक प्रकृति की होती है, इसलिए इसे लेकर कार्यकर्ताओं के बीच उत्सुकता बनी रहती है।
अधिनियम में एल्डरमैन नियुक्ति का प्रावधान
छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1956 की धारा-9 के तहत नगरीय निकायों में एल्डरमैन और दिव्यांग मनोनीत सदस्य नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। नियमानुसार नगर निगमों में आठ, नगर पालिकाओं में पांच और नगर पंचायतों में तीन एल्डरमैन नियुक्त किए जाते हैं।
हालांकि, यदि किसी निकाय में वार्डों की संख्या अधिक होती है, तो एल्डरमैनों की संख्या बढ़ाने का भी प्रावधान है। इन नियुक्तियों के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों को परिषद में शामिल किया जाता है, जो शहर के विकास और प्रशासन से जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव दे सकें।
667 एल्डरमैनों की नियुक्ति प्रस्तावित
फरवरी 2025 में हुए नगरीय निकाय चुनाव में प्रदेश के 10 नगर निगमों, 49 नगरपालिकाओं और 114 नगर पंचायतों में मतदान कराया गया था। इस आधार पर नगर निगमों में 80, नगर पालिकाओं में 245 और नगर पंचायतों में 342 एल्डरमैनों की नियुक्ति की जानी है।
इस प्रकार प्रदेश में कुल 667 एल्डरमैनों की नियुक्ति की जानी है, लेकिन अब तक इस प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जा सका है। नियुक्ति में हो रही देरी के कारण राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
परिषद बैठकों में निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका
नगरीय निकायों में मनोनीत एल्डरमैन को वार्ड पार्षदों की तरह ही पार्षद निधि भी प्रदान की जाती है। वे परिषद की बैठकों में भाग लेते हैं और शहर के विकास कार्यों, नागरिक सुविधाओं तथा विभिन्न योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर अपने सुझाव देते हैं। इसलिए एल्डरमैन की भूमिका परिषद के निर्णयों और योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
10 नगर निगमों में भाजपा के महापौर
फरवरी 2025 में प्रदेश के 10 नगर निगमों रायपुर, दुर्ग, कोरबा, धमतरी, राजनांदगांव, बिलासपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर, रायगढ़ और चिरमिरी में चुनाव हुए थे। इन सभी नगर निगमों में भाजपा के महापौर चुने गए।
इसके अलावा 49 नगरपालिकाओं में से 35 पर भाजपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, जबकि आठ पर कांग्रेस, एक पर आम आदमी पार्टी और पांच पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।
वहीं, 114 नगर पंचायतों में भाजपा के 81, कांग्रेस के 22, बसपा के एक और 10 निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी।
नियुक्ति में देरी पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा
नगरीय निकायों में एल्डरमैनों की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा कार्यकर्ता लंबे समय से इस निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अब सबकी निगाहें राज्य सरकार के आगामी फैसले पर टिकी हुई हैं।