Chhattisgarh New Liquor Policy- राजस्व घाटे से जूझ रही विष्णु देव साय सरकार अब राज्य की शराब नीति में बड़ा बदलाव करने जा रही है. आबकारी विभाग ने 2024-25 के लिए ₹12,500 करोड़ का राजस्व लक्ष्य तय किया है, जबकि पिछले साल ₹3,000 करोड़ की कमी दर्ज की गई थी. इस अंतर को पाटने के लिए अब सरकार फिर से ‘ठेका पद्धति’ (Contract System) लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है.
रायपुर. छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार शराब बिक्री नीति में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है. पिछले वित्त वर्ष में ₹3,000 करोड़ के राजस्व घाटे के बाद अब 2024-25 के लिए ₹12,500 करोड़ का लक्ष्य रखा गया है. इसे हासिल करने के लिए सरकार 2017 में लागू सरकारी बिक्री सिस्टम को हटाकर ठेका पद्धति (Contract System) फिर से लागू करने पर विचार कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि ठेका सिस्टम से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और अवैध शराब बिक्री पर लगाम लगेगी. प्रस्तावित नई नीति का मसौदा तैयार है, जिसे जल्द कैबिनेट के सामने रखा जाएगा.
2017 से डॉ. रमन सिंह सरकार द्वारा शुरू की गई सरकारी बिक्री प्रणाली (State-run liquor model) अब सवालों के घेरे में है. भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार ने इसे जारी रखा था, लेकिन इस व्यवस्था से न तो अवैध शराब की बिक्री रुकी और न ही राजस्व लक्ष्य पूरे हो पाए. साय सरकार का मानना है कि सरकारी दुकानों के जरिए बिक्री की यह प्रणाली अब अप्रभावी हो चुकी है. इधर, कांग्रेस ने हमला शुरू कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि सरकार सबकुछ अपने हाथ में रखना चाहती है, केवल ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए बदलाव किया जा रहा है. सरकार ने खुद बदलाव करके सब कुछ फिर दोबारा निजी हाथों में देने की तैयारी क्यों कर रहे हैं..?
ठेका सिस्टम से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ठेका पद्धति से निजी भागीदारी बढ़ेगी और लाइसेंस शुल्क से सरकार की कमाई स्वतः बढ़ेगी. इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बनेगी और अवैध शराब की बिक्री पर नियंत्रण संभव होगा. छत्तीसगढ़ में अवैध शराब का सबसे बड़ा स्रोत मध्य प्रदेश की सीमावर्ती बेल्ट है, जहां से तस्करी लगातार बढ़ी है. नई नीति इस पर भी अंकुश लगाने का प्रयास है.
नई नीति का मसौदा तैयार
CG NEWS : आबकारी विभाग की सचिव सह आयुक्त आर. संगीता की अगुवाई में पिछले महीने विभागीय अधिकारियों, उद्योग प्रतिनिधियों और लाइसेंस धारकों के साथ बैठक हुई. इस बैठक में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और राजस्व के बेहतर संतुलन पर चर्चा हुई. नीति का प्रारंभिक मसौदा तैयार है, जिसे अब राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा. सूत्रों के अनुसार, सरकार 2026-27 तक एक स्थायी और व्यावहारिक नीति लागू करना चाहती है.