जगदलपुर। तेलंगाना में एक बार फिर माओवादी संगठन को बड़ा झटका लग सकता है. माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो मेंबर और पूर्व जनरल सेक्रेट्री मुप्पाला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति के आत्मसमर्पण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.

गणपति, माओवादी संगठन का इस वक्त सबसे वरिष्ठ और कद्दावर चेहरा माना जाता है. करीब चार दशक तक अंडरग्राउंड रहकर संगठन को दिशा देने वाला गणपति, देशभर में माओवादी गतिविधियों का रणनीतिक मास्टरमाइंड रहा है. 1970 के दशक में नक्सल का विचारधारा अपनाने वाला 2004 से 2018 तक महासचिव के पद पर रहा.

साल 2018 में गणपति ने बढ़ती उम्र और गंभीर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए CPI (माओवादी) के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन इसके बाद भी वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल बना रहा.

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, गणपति के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में 150 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं जिनमें हत्या, विस्फोट, देशद्रोह और यूएपीए जैसे आरोप शामिल हैं. गणपति पर पूरे देश में करीब 3.5 करोड़ रुपए का इनाम घोषित है. छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ रुपए का तो पड़ोसी राज्य तेलंगाना में 25 लाख रुपए का ईनाम रखा गया है.

अगर आत्मसमर्पण की ये खबरें आधिकारिक रूप से पुष्टि होती हैं, तो यह माओवादी संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा नैतिक और रणनीतिक झटका माना जाएगा.

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि गणपति के हटने के बाद पहले ही संगठन कमजोर पड़ा है, और अब यह घटनाक्रम नक्सल नेटवर्क के पूरी तरह टूटने की दिशा में बड़ा संकेत हो सकता है. फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं, और आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है.

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Khem Lal Sahu
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