रंगों का त्योहार होली अब केवल हुड़दंग और चटख रंगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शहर के लोगों में अब अपनी सेहत और त्वचा को लेकर बड़ी जागरूकता देखी जा रही है। यही कारण है कि इस बार शहर के बाजारों में केमिकल वाले पक्के रंगों की जगह हर्बल और आर्गेनिक गुलाल ने ले ली है।

बाजार में बढ़ी मांग को देखते हुए दुकानदारों ने भी प्राकृतिक रंगों का भारी स्टाक जमा किया है। पिछले कुछ वर्षों के अनुभवों ने लोगों को डराया है। पक्के रंगों में मौजूद कांच के कण, लेड और खतरनाक केमिकल्स न केवल त्वचा में जलन पैदा करते हैं, बल्कि आंखों और सांस की बीमारियों का कारण भी बनते हैं। शहर के त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि होली के बाद क्लीनिकों पर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाती थी, लेकिन अब लोग खुद ही सतर्क हो रहे हैं।

हाट बाजार: शुद्धता का नया

  • ठिकाना शहर के फूलबाग के पास हाट बाजार में इस बार विशेष हर्बल कार्नर सजाए जा रहे हैं। यहां स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार किए गए रंग उपलब्ध रहेंगे। यहां गेंदे के फूल, चुकंदर, पालक और हल्दी से तैयार किए गए गुलाल मिल रहे हैं।

  • चंदन और गुलाब की खुशबू वाले गुलाल की डिमांड सबसे अधिक है, जो चेहरे पर लगने के बाद भी सौम्य रहते हैं। 27 फरवरी यानि शुक्रवार से हाट बाजार में होली पर स्पेशल मेला लगाया जा रहा है। इसमें महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार हर्बल रंग सहित अन्य सामग्री उपलब्ध होगी।

  • कैसे पहचाने असली हर्बल रंग

    बाजार में हर्बल के नाम पर नकली रंग भी बिक सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि असली हर्बल गुलाल हाथों पर लगाने के बाद हल्का महसूस होता है और उसकी महक बहुत तेज या चुभने वाली नहीं होती है। साथ ही, पानी से हाथ थोने पर वह आसानी से निकल जाता है और कोई दाग नहीं छोड़ता है।

Share.
Leave A Reply

Khem Lal Sahu
Editor & Publisher

Contact Us

Address:
Ward No. 11, Village – Baigna, Post – Goindri,
Goindri, District – Mungeli, Chhattisgarh – 495335, India

Email:
mormati.in@gmail.com

Contact Number:
+91 78985 90004

© 2025 MorMati. Designed by Nimble Technology.

Exit mobile version